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Monday, July 11, 2016

मुझे चुनाव नहीं लड़ना-चौधरी अजीत सिंह

यूपी विधानसभा 2017 चुनाव नजदीक है ऐसे में हर राजनीतिक पार्टी अपना-अपना दमखम दिखाने को तैयार है। लेकिन खबर रही है की आरएलडी में टिकट बंटवारे को लेकर धमासान मचा हुआ है। आगामी विधानसभा में पार्टी के बागपत से टिकट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। ऐसे में एक वीडियो वायरल हो गया है जिसमें पार्टी के सुप्रीमो अजीत सिंह अपने दिल्ली आवास पर अपने समर्थकों को धमकाते हुए कह रहे हैं की जाओ भाग जाओ यहां से मुझे चुनाव नहीं लड़ना।

दरअसल अजित सिंह के भड़कने की वजह पार्टी के टिकट को लेकर है। बागपत विधानसभा क्षेत्र से मदन भैया जो की एक बाहुबली है और आरएलडी से पहले भी विधायक रह चुके हैं और इस बार भी आरएलडी से चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन बागपत की जनता मदन भैया के विरोध में है। वहां की जनता पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष योगेश धामा का समर्थन कर रही है और योगेश धामा को टिकट देने की मांग को लेकर ही अजित सिंह से मिलने उनके दिल्ली आवास पर पहुंची थी।

जब बागपत के लोगों ने अजित सिंह से ये कह डाला की वो सिर्फ योगेश धामा को ही वोट देंगे और अन्य किसी प्रत्याशी को वोट नही देंगे तो अजीत सिंह इसे सुनते हीं भड़क उठे। उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और वह यह कहते हुए लोगों को अपने आवास जाने के लिए कहा की उन्होंने ही योगेश धामा को कहां से उठाकर कहां पहुंचाया और क्या बनाया है।

इस दौरान चौधरी अजित सिंह का किसी ने लोगों को धमकाते हुए वीडियो मोबाईल में रिकॉर्ड कर लिया। अजित सिंह के इस बर्ताव से और लोगों के विरोध से साफ़ है की इन दिनों आरएलडी खेमे में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। क्योंकि अजित सिंह का यह वीडियो उनके किसी समर्थक ने ही बनाकर वायरल कर दिया है।


Sunday, July 10, 2016

सलमान खान की फिल्म सुल्तान की समीक्षा

आखिरकार 6 जुलाई का दिन आया और रिलीज हो गई सलमान खान की फिल्म 'सुल्तान'. पहली बार सलमान ने इस फिल्म में अनुष्का शर्मा और डायरेक्टर 'अली अब्बास जफर' के साथ काम किया है. क्या 'बजरंगी भाईजान' और 'किक' की तरह एक बार फिर से सलमान का जादू बॉक्स ऑफिस पर चलेगा? आइए पता करते हैं.


कहानी 
फिल्म की कहानी हरियाणा के रहने वाले सुल्तान अली खान (सलमान खान) की है जिसकी मुलाकात जब आरफा (अनुष्का शर्मा) से होती है तो उसकी रेसलिंग देखकर सुल्तान भी एक रेसलर बनने की चाह रखने लगता है क्योंकि उसके हिसाब से एक रेसलर की ही शादी, रेसलर से हो सकती है. इसी दौरान कहानी में कई सारे उतार चढ़ाव आते हैं, जिसकी वजह से सुल्तान की पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी काफी प्रभावित होती है और आखिरकार एक खास वजह से खुद को साबित करने के लिए सुल्तान एक अहम रेसलिंग लड़ता है, दिल्ली का बिजनेसमैन आकाश (अमित साद) और कोच (रणदीप हुड्डा) उसकी वापसी के लिए काफी मदद करते हैं. अब क्या सुल्तान दुनिया के सामने खुद को साबित कर पाने में सक्षम हो पाता है? इसका पता आपको थिएटर तक जाकर ही चल पाएगा.

स्क्रिप्ट 
फिल्म की कहानी तो रेसलर की जिंदगी पर आधारित है लेकिन फिल्मांकन के दौरान काफी लंबी लगने लगती है, सिलसिलेवार कई सारी घटनाएं घटती जाती हैं, जो वर्तमान और फ्लैशबैक के साथ गुजरती हैं. इंटरवल के बाद थोड़ी बोरियत भी होने लगती है, यही कारण है की फिल्म को एडिटिंग के साथ और भी क्रिस्प किया जा सकता था. हालांकि लोकेशंस और सिनेमेटोग्राफी काबिल ए तारीफ हैं. सलमान की मौजूदगी फिल्म को और भी दर्शनीय बनाती है. फाइट सीक्वेंस कमाल के हैं साथ ही सिनेमेटोग्राफी जबरदस्त है.

अभिनय 
सलमान खान के शारीरिक बदलाव को देखकर लगता है की उन्होंने फिल्म के लिए जबरदस्त मेहनत की है और वो पर्दे पर नजर भी आती है. मिटटी, मैट और फिर रिंग में फाइट करते हुए सलमान को देखना एक ट्रीट है. वहीं अनुष्का शर्मा ने भी 'आरफा' का किरदार बखूबी निभाया है और स्क्रीन पर खूब जचती हैं. फिल्म में अमित साद, रणदीप हुड्डा और बाकी सह-कलाकारों का काम भी अच्छा है. सलमान और अनुष्का के हरियाणवी संवाद भी काबिल ए तारीफ हैं.
कमजोर कड़ी

फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी लंबाई है. फिल्म को अच्छे तरीके से एडिट करके छोटा और क्रिस्प किया जा सकता था. वैसे तो फिल्म की कमाई बहुत होगी क्योंकि 5 दिनों का वीकेंड मिला है लेकिन उस हिसाब से फिल्म को और भी ज्यादा कट टू कट बनाया जा सकता था.

संगीत
फिल्म का संगीत अच्छा है. विशाल शेखर ने कहानी की रफ्तार के हिसाब से गीत बनाए हैं, और कुश्ती के दौरान बैकग्राउंड स्कोर और भी ज्यादा अच्छा लगता है. टाइटल ट्रैक पूरी फिल्म के दौरान उर्जा भरता है.

कॉमेडियन कपिल शर्मा ने इंग्लिश बोलने वालों को कुछ ऐसे दिखाया बाबाजी का ठुल्लु


कॉमेडियन कपिल शर्मा हमेशा सबको हंसाते नजर आते हैं। शायद ही कभी कपिल को आपने गुस्से में देखा हो। हाल ही में कपिल शर्मा का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में कपिल गुस्से में नज़र आ रहे हैं।

दरअसल, यह वीडियो एक एड फिल्म का है जिसमें कपिल कुछ गुंडों को मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस एड में जब एक लड़का एक एक्टर को बोलता है कि आपको अंग्रेजी तो आती नहीं एक्टर बनने के ख्वाब देख रहे हो तो कपिल ये बात सुन लेते हैं। फिर क्या कपिल उस शख्स की इस बात को लेकर उसे झाड़ देते हैं।

इस एड फिल्म में दिखाया गया है कि अंग्रेजी ही सबकुछ नहीं है। लोग अपने टैलेंट से आगे बढ़ते हैं ना कि अंग्रेजी में ज्ञान झाड़कर। ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार को क्षेत्रीय फिल्मों के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए - फिल्म डायरेक्टर संजीव वेदवान


क्षेत्रीय फिल्मों का जमाना है .... संजीव वेदवान


Thursday, June 2, 2016

यूट्यूब से कैसे होती है कमाई?

यूट्यूब से कैसे होती है कमाई?
श्वेता पांडेय मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

नब्बे के दशक और 2000 के दशक के शुरुआती दौर में नई फ़िल्मों का ट्रेलर देखने के लिए लोग टीवी पर चैनल बदलते नज़र आते थे. लेकिन अब ज़माना बदल गया है. छोटी बड़ी सभी तरह की फ़िल्मों के ट्रेलर सीधे यूट्यूब पर ही लॉन्च हो रहे हैं.यहीं नहीं एआईबी, द वायरल फ़ीवर, द प्रीटेन्शस मूवी रिव्यू जैसे कार्यक्रम तो ख़ासतौर पर यूट्यूब पर ही प्रसारित होते हैं और इन्हें देखने वालों की भी तादाद कम नहीं है.यहां तक कि पूरी की पूरी फ़िल्म ही इस प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध होती है.लोग इस पर व्‍यक्तिगत चैनल बनाकर वीडियो ब्रॉडकास्‍ट कर रहे हैं इसके बदले में उन्‍हें यूट्यूब पैसा दे रहा है.



लेकिन सवाल है कि यूट्यूब पर अपना वीडियो या कार्यक्रम डालकर लोग पैसा कैसे कमाते हैं?
पूरी की पूरी फ़िल्में यूट्यूब पर उपलब्ध होने से क्या निर्माता को नुक़सान नहीं होता?
क्या इससे पायरेसी का ख़तरा नहीं पैदा होता?
एक आम व्यक्ति इस प्लेटफ़ॉर्म से कैसे पैसे कमा सकता है?
यूट्यूब के कंटेंट ऑपरेशंस प्रमुख सत्या राघवन के मुताबिक़ वीडियो बनाने वाले से लेकर विज्ञापन देने वाले भी यूट्यूब से अच्‍छी आमदनी कर रहे हैं. सत्या बताते हैं, "बीते एक साल में लोगों का रुझान इस ओर काफ़ी हुआ है. इस बात को बॉलीवुड ने भी काफ़ी अच्छी तरह से समझा और फ़िल्म निर्माता भी अपनी फिल्मों के प्रमोशन तक के लिए यूट्यूब के चैनल पर आने लगे हैं."


'नहीं होती पायरेसी'
पायरेसी के सवाल पर सत्या ने कहा, "पायरेसी का ख़तरा इससे नहीं हो सकता है, क्योंकि फ़िल्म बनने के बाद निर्माता-निर्देशक यूट्यूब से संपर्क कर लेते हैं, साथ ही 29 से 60 दिन का क़रार भी होता है. फिल्म सिनेमाहॉल से उतरने के बाद ही यूट्यूब पर आती है." पैसा, यूट्यूब के वीडियो पर आने वाले विज्ञापनों से आता है.
सत्या बताते हैं कि विज्ञापनों से आने वाली आमदनी का 45 फ़ीसदी यूट्यूब और 55 फ़ीसदी वीडियो के निर्माता को जाता है. 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी फ़िल्म बना चुके अपूर्व लखिया कहते हैं, "यह एक बहुत अच्छा मंच है. यहां हम दर्शकों को वह भी दिखा सकते हैं, जिन्हें आम तौर पर नहीं दिखाया जा सकता. मसलन फिल्म की मेकिंग आदि."

वहीं ‘डेल्ही-बेली’ के निर्देशक अभि‍नय देव का कहना है, "यूट्यूब की वजह से आपका उत्पाद ज़्यादा से ज़्यादा दर्शक देख सकते हैं, यह बॉलीवुड के लिए भी बड़ा और अच्छा मंच है."

'सेंसरशिप नहीं'
हां, यूट्यूब से सीडी/डीवीडी पार्लर और बाज़ार पर ज़रूर विपरीत असर पड़ने की बातें हो रही हैं.
दिनों दिन इंटरनेट की बढ़ती रफ़्तार से अब इस प्लेटफ़ॉर्म पर वीडियो देख पाना उपभोक्ताओं को ज़्यादा सुविधाजनक लगने लगा है.

लेकिन कई दफ़ा यूट्यूब पर ऐसी सामग्री आ जाती है जो कई लोगों को आपत्तिजनक लगती है.
अभी इस प्लेटफ़ॉर्म पर आने वाले वीडियो पर किसी तरह की सेंसरशिप का कोई प्रावधान नहीं है.
हां, अगर किसी को इन पर आपत्ति हो तो वो यूट्यूब को रिपोर्ट कर सकता है जिसे सही पाने पर उस वीडियो को हटा दिया जाता है.
साभार बी बी सी हिंदी